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अँखियाँ

कभी ये तरस जाती हैं,
कभी ये बरस जाती हैं,
अँखियाँ तो वो हैं जो बिन बोले ही सब कह जाती हैं

लबों पर तेरे क्यों दिल की बात आती नहीं, 
प्यार है तुझको भी मगर ये तू कह पाती नही,
देख कर मुझको जब तू यूँ शर्माती है,
अँखियाँ तेरी बिन बोले सब कह जाती हैं

अँखियाँ तो वो हैं जो बिन बोले ही सब कह जाती हैं 

कल देर रात तक मुझे तेरी याद तडपाती रही ,
कभी नीद मे कभी सपनों मे तू आती रही,
तन्हा -तन्हा ये रातें तेरी याद म़े यूँ गुजर जाती हैं ,
अँखियाँ तो तेरी भी जागी-जागी सी लगती हैं 
अँखियाँ तो वो हैं जो बिन बोले ही सब कह जाती हैं 

छिपकर तू देखती है मुझको, बिन मेरे तू रह पाती नही
मुझसे मोहब्बत है तुझको क्यों ये तू छिपाती रही
अदा कहती हो तुम इससे यहाँ मेरी जान जाती है,
अँखियाँ ही तेरी थोडा सब्र बंधाती हैं 
अँखियाँ तो वो हैं जो बिन बोले ही सब कह जाती हैं

कभी ये तरस जाती हैं,
कभी ये बरस जाती हैं,
अँखियाँ तो वो हैं जो बिन बोले ही सब कह जाती हैं
(आँखों ने तेरी जबसे इज़हार किया है
चाहता है ये दिल की कह्दुं सबसे
हाँ मैंने भी प्यार किया है...... हाँ मैने भी प्यार किया है)
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