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सबसे प्यारी सबसे न्यारी सखी सहेली तुम






सबसे प्यारी सबसे न्यारी सखी- सहेली तुम

इंद्रधनुषी रंगो से ओतप्रोत कवियों की प्रेरणा तुम

आंतरिक–बाह्य सौंदर्य से परिपूर्ण तुम

एक रमणीक दुल्हन सी मनोहारिणी तुम

गज़लों में गज़ल, ऋतुओं में बसंत तुम

पतझड़ को पराजित करती, खिला गुलाब तुम

सरसों के पीले खेत सी लहलाती अल्हड तुम

बसंत का अहसास दिलाती, निष्ठुर जाड़े का अंत तुम

मिटटी की महक, पंछियो की चहक तुम

गजगामिनी, मनोहारिणी, मृदुभाषिणी तुम

सबसे प्यारी सबसे न्यारी सखी-सहेली तुम !!

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